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खरगोश और कछुआ की दौड़ – एक नए अंदाज में

  • Post published:August 10, 2021
  • Post category:Stories
  • Reading time:1 mins read

खरगोश और कछुआ की दौड़ – एक नए अंदाज में: आप सभी ने बचपन में खरगोश और कछुआ की दौड़ की कहानी तो सुनी ही होगी। यह उसी कहानी से प्रेरित होकर दोबारा कुछ नए अंदाज में लिखी गयी है।

जंगल में एक बड़ी पहाड़ी के पीछे बहुत सारे जंगली जानवर रहते थे। उन्हीं में एक खरगोश और कछुआ भी थे। पहाड़ी के बीच से एक नदी निकलती थी। सभी जंगली जानवर वहां पानी पीने आया करते थे।

जब कभी भी कोई बड़ा और खतनाक जानवर वहां आता तो छोटे छोटे पशु पक्षी वहाँ से भाग जाते थे। खरगोश और उस जैसे कई फुर्तीले जानवर तुरंत भाग जाते थे। ये देखकर वहां रह जाने वाले छोटे छोटे जानवर पीछे रह जाते थे। जिनको खरगोश बहुत चिडता था।

एक बार खरगोश को अपनी तेज चाल पर घमंड हो गया और वह जो मिलता उसे रेस लगाने के लिए चुनौती देता। उसने कछुए को भी रेस लगाने की चुनौती देने के साथ -साथ उसका मजाक भी उड़ाया। उसने कहा – तुम कितना धीरे चलते हो !

कछुआ हमेशा उसकी बात सुनकर हमेशा अनसुनी कर देता था। पर एक दिन खरगोश से उसे चुनौती देदी। यह सुनकर कछुए को गुस्सा आ गया और उसने खरगोश की चुनौती स्वीकार कर ली। खरगोश जोर-जोर से हँसने लगा, हँसते हुए उसने कछुए से कहा कि तुम मुझसे रेस लगाओगे ? कछुए ने कहा कल हम दोनों पहाड़ी के दूसरी तरफ जायेंगे फिर देखते हैं कौन पहले पहुँचता है।

खरगोश और कछुआ की दौड़ – एक नए अंदाज में

अगले दिन सुबह दौड़ शुरू हुई। खरगोश तेजी से दौड़ा और काफी आगे जाने के बाद उसने पीछे मुड़ कर देखा। कछुआ कहीं नज़र ही नहीं आ रहा था, उसने मन ही मन सोचा यहां तक आने में कछुए को बहुत समय लगेगा, चलो कुछ देर आराम कर लेते हैं। वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। लेटे-लेटे कब उसको नींद आ गई, पता ही नहीं चला।

कछुआ धीरे-धीरे लगातार चलता रहा। बहुत देर बाद जब खरगोश की नींद खुली तो कछुआ अपनी दौड़ पूरी करने ही वाला था। खरगोश पूरी जान लगाकर तेजी से भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ दौड़ जीत गया।

अब दौड़ हारने के बाद खरगोश बहुत निराश होता है, अपनी हार पर वह बहुत चिंतन करता है। अब उसे समझ आता है कि वह यह दौड़ अति आत्मविश्वास (Overconfidence) के कारण हार गया था। उसे अपनी मंजिल तक पहुंच कर ही रुकना चाहिए था।

वह अगले दिन खरगोश नदी के किनारे पहुंच कर फिर से कछुए को दौड़ की चुनौती देता है। कछुआ पहली दौड़ जीत कर आत्मविश्वास से भरा हुआ था अतः दुबारा दौड़ के लिए तुरंत मान जाता है।

खरगोश और कछुआ की दौड़ – एक नए अंदाज में

फिर दौड़ शुरू हुई, इस बार खरगोश बिना रुके अंत तक दौड़ता गया, और कछुए को एक बहुत बड़े अंतर से हराया। हार के बाद अब कछुआ कुछ सोच-विचार करता है और उसे यह बात समझ में आती है कि जिस तरह से अभी दौड़ हो रही थी वह कभी-भी इसे जीत नहीं सकता।

वह एक बार फिर खरगोश को एक नई दौड़ के लिए ललकारता (Challenge) है, पर इस बार वह दौड़ का रास्ता अपने मुताबिक रखने को कहता है। खरगोश तैयार हो जाता है।

खरगोश और कछुआ की दौड़ – एक नए अंदाज में

दौड़ फिर से शुरू होती है। खरगोश तेजी से तय स्थान की और दौड़ता है, पर उस रास्ते में एक तेज धार वाली नदी बह रही होती है अतः बेचारे खरगोश को वहीं रुकना पड़ता है। कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ वहाँ पहुंचता है और आराम से नदी पार करके लक्ष्य तक पहुंचकर दौड़ जीत जाता है।

इन सभी दौड़ें दौड़ने के बाद अब कछुआ और खरगोश बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे और एक दूूसरे की ताकत और कमजोरी समझने लगे थे। दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दूूसरे का साथ दें तो कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं।

इसलिए दोनों ने आखिरी रेस एक बार फिर से मिलकर दौड़ने का फैसला किया, पर इस बार प्रतियोगी के रूप में नहीं बल्कि टीम के रूप में काम करने का निश्चय किया।

दोनों स्टार्टिंग लाइन पर खड़े हो गये, रेस शुरू होते ही खरगोश ने कछुए को ऊपर उठा लिया और तेजी से दौड़ने लगा। दोनों जल्द ही नदी के किनारे पहुंच गए। अब कछुए की बारी थी, कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ बैठाया और दोनों आराम से नदी पार कर गए। अब एक बार फिर खरगोश कछुए को उठाकर दौड़ पड़ा और दोनों ने साथ मिलकर दौड़ पूरी कर ली। दोनों बहुत ही खुश और संतुष्ट थे, आज से पहले कोई रेस जीत कर उन्हें इतनी ख़ुशी नहीं मिली थी।

खरगोश और कछुआ दोनों साथ मिलकर रहने लगते हैं। क्योकि वो अब एक अच्छे दोस्त बन गए थे।

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