Ek Thi Naagin

Ek Thi Naagin: एक दिन काली अंधेरी रात में आकाश में बिजली कड़क रही थी साथ ही तेज बारिश भी हो रही थी। एक लड़की जिसका नाम बेला है इस कयामत की रात में जंगल से गुज़रते हुए जा रही है।

बेला का रूप इतना सुंदर है कि उसके सामने अप्सरा भी फीकी पड़े। बेला के कपड़े उसकी सुंदरता में ओर रोनक ला रहे है। बेला चलते हुए जा रही होती ही है कि इस भयंकर बारिश के साथ उसकी आँखों मे रक्त दौड़ने रहा है। उसकी आँखे देखकर लगता है कि उसके सर पर खून सवार हो, बेला का क्रोध उसपे हावी होने लगता है। मानो की अब किसी का काल बनने वाली हो।

अब बेला एक पेड़ के पास खड़ी हो जाती है और जोर से चीखती है। जिसकी चीख से पूरा आसमान गूंज उठता है। वो चीखकर बोलती है, “विक्रमादित्य में वापिस आ गई हूं। अब देख में तेरा क्या हाल करूँगी । तूने जो किया है, इसकी सजा तो तुजे मिलेंगी ही और वो भी मेरे हाथों से, इतना बोल कर बेला आगे बढ़ती है और राजा विक्रमादित्य के महल के पास जाकर रुक जाती है। और महल को देखते हुए कहती है, “विक्रमादित्य, तेरा काल आ चुका है, तेरी मौत मेरे ही हाथों होगी। जैसे आज ये बिजली कड़क रही है ना बहुत जल्द तेरे जीवन मे भी ऐसी ही बिजली कड़केगी और वो तेरे जीवन का आखरी दिन होगा।” – Read Complete Series: Ek Thi Naagin

अब बेला अपनी असली पहचान छिपकर नौकरी मांगने के लिए महल अंदर चली जाती है। बेला की सुंदरता को देखते ही विक्रमादित्य होश खो देता है। वह उसे दासी के काम पर रख लेता है। बेला राजा विक्रमादित्य की सेविका का काम शुरू करती है। बेला की सुंदरता का जादू धीरे धीरे विक्रमादित्य पर हावी होने लगती है।

बेला अपनी योजना में सफल हो रही होती है। विक्रमादित्य को बेला की सेवा और बेला दोनो बहुत पसंद आने लगते है। विक्रमादित्य बेला की सुंदरता की प्रशंसा करते थकते नही थे। ये बात राजा विक्रमादित्य की पत्नी रानी यामिनी को खटकने लगती है। कुछ दिन बीतते है और राजा बेला के सामने रानी बनने का प्रस्ताव रखते है। बेला राजा के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है। क्यों कि उसे महल के अंदर रहकर अपना बदला जो लेना है।

एक दिन विक्रमादित्य और बेला दोनो राजमहल के बाग में होते है। तभी राजा का बड़ा बेटा राजकुमार आदित्य आते है।

आदित्य: पिताश्री, जल्दी चलिये माँ को पुत्री हुई है। ये सुनते ही राजा तुरंत बेला के पास से उठ कर यामिनी के पास जाता है। बेला भी साथ मे जाती है। यामिनी ने एक पुत्री को जन्म दिया है। लेकिन उस पुत्री को देखते ही विक्रमादित्य चौक जाता है और गुस्से से कहता है, “यामिनी, ये क्या? हमारी पुत्री का रंग इतना काला कैसे? – Read Complete Series: Ek Thi Naagin

यामिनी: महाराज, ये जैसी भी है आखिर है तो हमारी ही पुत्री।

ये सब सुनते ही बेला भी बोल उठती है, महाराज, आप शांत हो जाइए। इस पुत्री का रंग काला है तो आखिर इसमें गलती किसी की नही है। महादेव की यही इच्छा रही होगी। इसीलिए शायद इस बच्ची का रंग ऐसा है।

इतना बोलकर बेला वहां से चली जाती है। बेला की आखों में आंसू आ जाते है। क्यों ये काला रंग बेला ने पहली बार नही सुना था। उसका पूरा बचपन इस शब्द को सुनकर, ताना सहते हुए ही बीता था। कैसे उसको सब लोग अलग नज़र से देखते थे। कोई काली तो कोई बदनसीब कहकर पुकारता था। अभी जो हुआ ये सब देखकर बेला को उसका बचपन याद आने लगता है।

“एक दिन बेला और उसके भाई बहन के साथ घर के आंगन में बैठी होती है। तभी उसकी माँ मधुबाला आती है।

मधुबाला: चलो तुम तीनो ये मुल्तानी मिट्टी लगालो अपने चहेरे पर। इससे तुम्हारा चहेरा खिल उठेगा।

शिखा: माँ, मुझे नही लगानी ये मिट्टी। ये कितनी गंदी दिखती है। मै तो इतनी सुंदर दिखती हूँ, फिर में ये मिट्टी क्यो लगाऊ?

विक्रांत: माँ, आप एक काम कीजिये इस शिखा के भाग की भी मिट्टी मुझे और बेला दीदी को लगा दीजिये।

शिखा: हा माँ, बेला दीदी को के मिट्टी लगाओ। सब से ज्यादा इनको इसकी जरूरत है। क्योकि पूरे गाँव मे इनसे ज्यादा काला तो कोई दिखता ही नही है।

Ek Thi Naagin – शिखा की बात सुनकर मधुबाला को गुस्सा आता है। वो शिखा को तमाचा मारने जाती है कि बेला उसे रोक लेती है, “माँ, तुम शिखा को मत मारो। आखिर उसने क्या गलत बोला है। सही तो कह रही है। मुझसे ज्यादा काली दिखने वाली लड़की तो शायद इस दुनियां मे नही होगी।” इतना बोलते ही बेला रोते हुए आंगन में से घर मे चली जाती है। – Read Complete Series: Ek Thi Naagin

मधुबाला: शिखा, कभी भी अपनी सुंदरता का घमंड नही करना चाहिये। बेला तुम्हारी बड़ी बहन है। तुमने उसके रूप का मजाक उड़ाया फिर भी तुजे तमाचा खाने से उसीने बचाया है।

बेला रो रही होती है। तभी सुखीराम आते है। अपनी बेटी को रोता हुआ देख वो कहते है, “क्या हुआ? आज तुझे फिर किसी ने काली कहा?” ये सुनते ही मधुबाला कहती है, “आप भी क्या बोल रहे है? हम भी उसे ताना मारेंगे तो उसका क्या होगा?”

सुखीराम: अरे अब तो इसे आदत डाल देनी चाहिए ताना सुनने की।

मधुबाला: महेरबानी करके आप चुप हो जाइए। कुछ नही हुआ है। वो तो सिर्फ इस मुल्तानी मिट्टी को लेकर कुछ बात हो गई।

सुखीराम: लगाओ लगाओ। इसे रगड़ रगड़ कर मिट्टी लगाओ। शायद हमारे भाग खुल जाए और ये थोड़ी गोरी हो।

मधुबाला: आप क्या बोले जा रहे हो।

सुखीराम: सही कह रहा हूँ। पता नही इसके काले रंग की बजह और कितने ताने सुनने पड़ेंगे।

अब बेला अपने बचपन की याद में से बाहर निकलती है और खुद को शांत करती है। इस तरफ विक्रमादित्य राजगुरु के साथ कुछ बात कर रहे होते है।

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राजगुरु: महाराज, आज से करीब पच्चीस साल पहले जब आप के बेटे आदित्य का जन्म हुआ तब आप ने सर्प यज्ञ किया था जिसमे आपने सौ सर्पो की बली चढ़ाई थी। अब दो दिन बाद नागपंचमी है, तो मेरे खयाल से आपको अपनी दूसरी संतान के जन्म की खुशी में उस दिन नागदेव और महाकाल की महापूजा करनी चाहिए। – Read Complete Series: Ek Thi Naagin

विक्रमादित्य: जरूर राजगुरू आप कह रहे है वैसा ही होगा। साथी में उसी दिन मेरी पुत्री का नामकरण भी करूगा और आप सब की दूसरी रानी बेला के साथ सगाई भी करुंगा। गुरुवर आप तैयारियां कीजिए।

बेला अपने कक्ष में होती है वो कहती है, ” विक्रमादित्य, आखिर तू मेरी चाल में फस ही गया। अब देखना मै तेरा क्या हाल करती हूँ। ” इतना बोलते ही बेला को क्रोध आने लगता है। लेकिन बेला अपने मकसद के लिए अपनी पहचान छुपकर रखना चाहती है।

दो दिन बीत जाते है। नागपंचमी के पर्व पर राजमहल को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। सब लोग खुशी से जूम रहे होते है। दासियाँ बेला का श्रृंगार कर रही होती है। बेला की सुंदरता और साथ मे लाल रंग की अत्यंत सुंदर साड़ी उसके रूप को तेजस्वी बना रही थी। मानो ऐसा लग रहा था कि पूरे ब्रह्मांड में बेला से अधिक सुंदर कोई दिख ही नही सकता।

बेला खुद को आईने में देख रही होती है। उसकी आँखों मे पानी आ जाता है। वो मन मे कहती है, “ये सुंदरता तो आज मेरे पास है। लेकिन मै ही जानती हूं कि मैने अपने बीस साल कैसे बिताये है। इतना बोलते ही बेला अपनी यादों में फिर डूब जाती है।

काले रंग के कारण गांव में कोई भी बेला के साथ ठीक तरीके से बात भी नही करता था। सब बेला के रंग के कारण उसका मजाक उड़ाते थे। तो साथ ही बेला की छोटी बहन शिखा का रंग अत्यंत गोरा था। जिसके कारण पूरे गांव में उसका बड़ा नाम था।

एक ओर बेला को सब काली कहकर ताना मारते और दूसरी ओर शिखा को गोरी कहकर प्यार से बुलाते थे। गांव के लोगो के ताने सुनसुनकर अब मधुबाला और सुखिराम भी थक गए थे। एक दिन सुखीराम बेला से कहता है, “पता नही वो कोनसी मनहूस घड़ी थी जब तुने हमारे घर मे जन्म लिया।”

बस अब बेला की ये सब सहन करने की शक्ति खत्म हो गई थी। बेला की महादेव पर श्रद्धा थी। इसलिए बीस साल की बेला ने मन मे तय कर लिया की अब वो अपना जीवन महादेव को समर्पित कर देगी। – Read Complete Series: Ek Thi Naagin

अब बेला अपनी सगाई के लिए तैयार हो रही थी तभी वो अपनी सगाई के जोड़े को देखते हुए सोचती है, ” क्या करूँ में? विक्रमादित्य को माफ करू या नही! उसने मेरी जान ली थी और अब में भी उसकी जान लुंगी तो, आखिर मेरे में ओर उसमे फर्क ही क्या रहेगा? इसलिए विक्रमादित्य में तुम्हे माफ करती हूं। तुझसे शादी करके तेरे साथ एक नए जीवन की शरुआत करूँगी।” इसीके साथ बेला अपना इंतकाम भुलाकर प्यार की दास्तान लिखने की शरुआत करती है।

लेकिन उसे कहा पता था कि किस्मत ने तो उसके लिए कुछ ओर ही लिखा था। अब इस तरफ विक्रमादित्य दरबार मे जाकर प्रजा का स्वागत करते है।

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राजा विक्रमादित्य: आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है। आज का ये महा उत्सव किस लिए है वो तो आपको पता ही है। तो बस आप सभी राजकुटुंब को अपना आशीर्वाद दे, बस मेरी आपसे यही विनती है।

अब बेला तैयार होकर दरबार मे आती है। बेला को देखकर विक्रमादित्य होश खो जाता है। वो बेला को कहता है, “तुम आज किसी अप्सरा से कम नही लग रही हो। अत्यंत सुंदर।” तभी वहां आदित्य और यामिनी उसकी पुत्री के साथ आती है। राजगुरु महाकाल और नागदेव की पुजा आरंभ करवाते है, राजगुरु मंत्रोच्चार कर रहे है। – Read Complete Series: Ek Thi Naagin

सब लोग महापूजा का लाभ ले रहे होते है। महापूजा करते हुए अब नागदेव को दूध चढ़ाने की बारी आती है। सब लोग नागदेव की आराधना कर रहे होते है। लेकिन इस आराधना से बेला का मन विचलित होने लगता है। वो तुरंत पूजा में से उठ जाती है। ये देखते ही राजगुरु कहते है, “ऐसे पूजा के बीच मे से उठना अच्छी बात नही होती।”

बेला: क्षमा करना राजगुरु लेकिन में नही बैठ सकती। मुझे चक्कर आ रहे है। मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है।

विक्रमादित्य: बेला तुम जाओ। थोड़ी देर आराम कर लो। उसके बाद दासियाँ तुम्हें लेने आएंगी।

पूजा खत्म होते ही नागदेवता बेला के पास आते है ओर उसकी गर्दन पर लिपट जाते है। ये देखकर सब लोग घबराहट से पीछे हटने लगते है। लेकिन बेला कहती है, ” आप सब घबराए मत। ये नागदेव है कुछ नही करेंगे।” इतना कहने के साथ ही बेला मनमे कहती है, “है नागदेवता में जानती हूं कि आपने मुजे पहचान लिया है। लेकिन मेरी आपसे विनती है। आप मेरा असली रूप सामने ना आने दे।” बेला के मन की बात सुनके नागदेवता वहाँ से चले जाते है।

महापूजा समाप्त होती है। उसके बाद अब मनोरंजन की बारी आती है। कई कलाकार अपनी कला दिखा ने के लिए आते है। हर कोई अपनी कला से राजा का दिल जीतता है और राजा खुश होकर उनको उपहार भेट करते है।

थोड़ी देर में कुछ औरते और एक आदमी एक बक्से के साथ आते है। वो लोग महाराज को प्रणाम करते है और अपनी कला दिखाने की अनुमति मांगते है। वो कहते है कि आज नागपंचमी है तो उन्होंने ने विशेष तैयारी की है। जिसे देखकर सब खुश हो जाएंगे।

विक्रमादित्य भी खुशी से उन्हें अनुमति देता है। अब वो औरते गीत गाना शरू करती है।

सब लोग इस मधुर आवाज में जूम उठते है। तभी इन औरतो के साथ आया हुआ आदमी बक्सा खोलता है बीन निकालकर और बीन बजाना चालू करता है। अब सब लोग मधुर आवाज के साथ ही इस बीन की धुन में मग्न हो जाते है। लेकिन बेला को ये आवाज सुनकर कुछ होने लगता है। वो ये घुन की आवाज को सुन नही पाती।

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सब लोग ये धुन में मग्न होते है तभी बेला कानो पर हाथ रखके खड़ी होती है। लेकिन कुछ समय बाद बेला चक्कर खा के गिर जाती है। तभी वहाँ पर एक सांप आजाता है, सबका ध्यान सांप की तरफ़ जाता है। बीन की धुन बंध होती है।

बीन की धुन बंध होने से वो सांप मनुष्य रूप में आ जाता है। सब लोग ये देखकर चौक जाते है। विक्रमादित्य गुस्से से चिल्लाते हुए पूछते है, “कौन हो तुम ” लेकिन वो लड़की जो कुछ समय पहले एक सर्फ़ थी, कुछ नही बोलती ।

वो चुप चाप खड़ी रहती है। अब विक्रमादित्य गुस्सा में लड़की की तरफ बढ़ते है तभी दरबार के द्वार से एक आवाज आती है, “राजा विक्रमादित्य, मै आपको बताता हूँ कि ये कोन है?”

सबका ध्यान द्वार की ओर जाता है सब द्वार पे देखने लगते है। तभी द्वार से एक साधु जी अंदर आते है। साधु अंदर आकर राजा को प्रणाम करते है।

साधु: प्रणाम महाराज।

विक्रमादित्य: प्रणाम ! साधु महाराज जी। आप क्या कहना चाहते है?

साधु महाराज जी: महाराज, जब हमे किसी सर्प को पकडना हो तब हम बीन बजवाते है। ताकी सर्प पकड़ में आ जाये। आज भी मेने यही किया। जिससे एक सर्प पकड़ में आ गया।

महाराज, ये लड़की कोई साधारण लड़की नही है। ये एक इच्छाधारी नागिन है, ये आप के और आपके परिवार के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती है। यहाँ तक कि इस राज्य के लिए भी।

ये सब सुनकर वहां पर उपस्थित सभी लोगो के होश उड़ जाते हैं। फिर जब वो सब लोग उस लड़की की तरफ देखते है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है।

वो लड़की जो पहले एक सांप थी अचानक से गायब हो जाती है। सभी लोग एक दूसरे की तरह देखने लगते है। महाराज विक्रमादित्य भी ये सब देख कर घबरा जाते है।

सब लोग साधु महाराज से पूछते है कि “कौन थी वो” और अचानक से गायब कैसे होगयी। सब लोग इस बात से चिंतित थे,  इच्छाधारी नाग-नागिन बारे में उन्होंने सिर्फ कहानियों ही सुना था। आज जब वो सामने आयी तो सब लोग हक्के बक्के हैं।

कहानी अभी बाकी है इसका भाग 2 पढ़ें- Naagin: Atit Se Parichay

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