Naagin 3: Intaqaam

नागिन की इस रोमांचक सीरीज के पहले दो अध्याय Ek Thi Naagin और  Naagin 2: Atit se Parichay को अपना प्यार देने के लिए धन्यवाद। मुझे आशा है कि आपको यह अध्याय भी उतना ही रोचक लगेगा।

हमारी कहानी की मुख्य किरदार नागिन बेला जो राजा विक्रमादित्य से अपनी मोत का बदला लेने आए हुई होती है। लेकिन फिर जब विक्रमादित्य बेला के सामने राणी बननेका प्रस्ताव रखते है तो बेला भी इंतकाम भुलाकर मोहब्बत के सफर में चलने के लिए तैयार हो जाती है।

नागपंचमी के दिन बेला और विक्रमादित्य की सगाई होने वाली होती है। उसमें एक पंडित के रचे बिन के जाल में फस कर बेला का असली रूप सबके सामने आ जाता है। जिससे विक्रमादित्य बेला का घोर अपमान करता है। यहाँ तक कि वो बेला की बात सुने बिना उसे लात मारता है। जिसके कारण अब एक नागिन कसम खाती है कि वो एक बार फिर लौट के आएगी और अपना अधूरा इंतकाम पूरा करेगी। अब आगे की कहानी….

नागिन की इस रोमांचक सीरीज के पहले दो भाग नहीं पढ़े है तो पूरी कहानी समझने के लिए इन्हे भी पढ़ें: Ek Thi Naagin और  Naagin 2: Atit se Parichay

Naagin 3: Intaqaam

Naagin 3: Intaqaam– इस तरफ बेला राजमहल से दूर एक महारुद्र शिव मंदिर में जा रही है। बेला अत्यंत क्रोधित है। गुस्से में बेला शिवलिंग के सामने तांडव करने लगती है। बेला की आखों में अपमान का गुस्सा दिखाई देरहा है। क्रोध में तांडव करते करते बेला को उसके नागिन रूप का आरंभ याद आने लगता है। क्योंकि आज बेला को इच्छाधारी नागिन बने हुए पूरा एक महीना हो चुका है।

एक दिन बेला आधी रात को घर से भाग जाती है। वह भागकर जंगल में जाती है और एक बड़े पेड़ के नीचे बैठ जाती है। बेला ने अपनी आँखें बंद कर लीं और ‘ओम नमः शिवाय।’ जप करना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे, बेला शिव की तपस्या में इतनी लीन हो जाती है कि उसे पता ही नहीं चलता कि उसके आसपास क्या हो रहा है। बेला शिव के ध्यान में डूबी रहती है, चाहे बारिश हो या आंधी। समय बीतता जाता है।

तपस्या करते हुए बेला को एक वर्ष पूरा हो जाता है। एक दिन एक साँप बेला के पास आता है और बेला के शरीर के ऊपर चढ़ जाता है। बेला को इसके बारे में कुछ पता नही होता वो ध्यान में लीन होती है। देखते ही देखते साँप ने बेला की गर्दन पर डंक मार दिया। बेला कुछ भी महेसुस नही करती है। वो सिर्फ भक्ति में डुबी हुई होती है।

धीरे धीरे साप का विष बेला क़े पुरे शरीर में फेल जाता है और बेला अचानक बेहोश हो जाती है। बेहोशी की हालत में बेला के सामने एक नई दुनिया नजर आती है। बेला अपने पिछले जन्म को महसूस करने लगती है।

उसे अपना पिछला जन्म दिखाई देता है। कैसे वो महादेव की तपस्या कर रही थी। कैसे उसकी बली विक्रमादित्य ने चढ़ा दी। वो सब उसे दिखाई देता है। फिर वो होश में आती है। अब बेला अपने एक नए रूप नागस्विनी को पहचान जाती है। बेला उसके पिछले जन्म के साथ जुड़ जाती है। यानि कि वो अपने नागस्विनी रूप के साथ जुड़ जाती है।

Naagin 3: Intaqaam

बेला महादेव से प्राथना करते हए कहती है, “प्रभु, मुझे सब याद आ गया है। महादेव आपको अपने भक्त इतने प्रिय होते है ये में नही जानती थी प्रभु। मेने तो बेला स्वरूप में आपकी तपस्या सिर्फ इसलिए की थी कि में जान सकु की आपने मुझे ये काला वर्ण क्यों दिया। इसके कारण मुजे कितना कुछ सहन करना पड़ रहा है।

लेकिन अब में समज गई हूं कि आपने मुझे इस जन्म में काला वर्ण क्यो दिया ताकि में आपकी भक्ति करु और आप मुझे मेरी सच्चाई तक पहुचा सके। आप धन्य है प्रभु। मेने अपने पिछले जन्म में आपकी तपस्या में पूरे निन्यानबे साल बिता दिए थे लेकिन उस दुष्ट राजा ने मेरी जान ले ली।”

बेला महादेव से प्राथना कर रही होती है कि तभी जोरदार बारिश शरू हो जाती है। बारिश में बेला के पास एक खड्डे में पानी भर जाता है। बेला उस खड्डे में अपना चहेरा देखती है। उसे अपना काला वर्ण दिखाई देता है। बेला तुरंत आसमान की तरफ देखती है और महादेव से प्राथना करती है, प्रभु, आपने मुझे मेरे नागस्विनी रूप से तो मिलाया लेकिन मेरी तपस्या तो अधूरी ही रह गई।

मै इस काले वर्ण के साथ नही जीना चाहती। पिछले जन्म में भी मेरी तपस्या अधूरी रह गई और इस बार भी। अब आपको ही न्याय करना होगा। मैंने एक इच्छाधारी नागिन बनने की इच्छा से आपकी पूरी आस्था के साथ भक्ति की थी। आपकी भक्त आपसे भक्ति का फल माँग रही है प्रभु धीरे धीरे बेला का रूप सुंदर हो जाता है और उसका चहेरा तेजस्वी हो जाता है। उसकी आँखें नीले रंग की हो जाती है। बेला के कपड़े बदल जाते है। बेला के कपड़े उसकी सुंदरता में ओर रोनक ला रहे थे।

बेला समझ जाती है कि अब वो कोई साधरण स्त्री नही रही वो एक इच्छाधारी नागिन बन गई है।

बेला: हे शिवजी, आपने मुजे ये वरदान दिया। में धन्य हो गई प्रभु।

रात हो गई होती है। बेला अब शिवजी को प्रणाम करके खड़ी होती है और जंगल मे चलते हुए जाने लगती है। उसके बाद उसे आदिवासी पकड़ते है लेकिन वो वहासे निकल जाती है और विक्रमादित्य के महल अपना बदला लेने जाती है।

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….अब क्रोध तांडव करते हुए बेला बेहोश हो जाती है। थोड़ी देर बाद उसे होश आता है। तब वो खुद को एक वैध के घर मे पाती है।

बेला: वैधजी, मै यहां कैसे?
वैध: तुम्हें माहिर इधर ले कर आया है।
बेला: कौन माहिर?

तभी माहिर तुलसी के पत्ते लेकर आता है।

बेला: तुम कौन हो और मुझे यहां क्यो लाये हो ?
माहिर: अरे आप की तबियत ठीक नही है। आप ज्यादा मत बोलिये। मैंने आपको शिव मंदिर में बेहोश पड़ा देखा। आपको जगाने की बहुत कोशिश की लेकिन आप नही उठी इसलिए आपको इधर लेके आया। वैसे आपका नाम क्या है?

बेला: मेरा नाम बेला है और आपका बहुत शुक्रिया, कि मुझे इधर लेकर आए। लेकिन अब मुझे जाना होगा। बेला उठने की कोशिश करती है लेकिन वो खुद को संभाल नही पाती तभी माहिर आकर उसका हाथ पकड़ता है।

माहिर: सुनिये, आपकी तबियत ठीक नही है। अभी आप आराम कीजिये।

वैध: हाँ बेटी, तुम आराम करो और ये लो तुलसी के पत्ते खालो। फिर में तुम्हें जड़ीबूटी देता हूं। उससे तुम्हें आराम मिलेगा।

बेला: ठीक है।
माहिर: बेला, आखिर तुम हो कौन और मंदिर में कैसे गिर गई थी?
बेला: कुछ नही, दरसल मेरा इस दुनिया मे कोई नही है। मै अकेली हूँ। मै अपने लिए एक घर ढूढ़ रही थी। मंदिर देखा तो दर्शन करने गए थी और बेहोश हो गई।

माहिर:आप चिंता न करे, आपको इसी गांव में घर दिला दूँगा।
बेला: ठीक है।

अब बेला उसी गांव में रहने लगती है। धीरे धीरे बेला गांव के लोगो के साथ घुलमिल जाती है। सब गांव वालों को बेला और माहिर की जोड़ी पसंद होती है।

एक दिन बेला और माहिर चलते हुए बाते कर रहे होते है तभी उस गांव की कमला चाची आती है और कहती है – माहिर मेरी बात का बुरा मत मानना लेकिन ये बात सच ही है की अगर आज तुम्हारे माँ-बाप जिंदा होतो तो वो भी यही कहते। मै तुम्हारे माँ जैसी ही हु इसलिए कह रही हूँ।

तुम्हारी और बेला की जोड़ी बहुत सुंदर लगती है। तुम दोनों को शादी कर लेनी चाहिए। इतना बोल कर कमला चाची वहां से चली जाती है। कमला चाची की बात सुनके माहिर कहता है – बेला, वैसे चाची की बात गलत नही है, मुझे भी तुम बहुत पसंद हो। क्या तुम मुझसे शादी करोगी? ये सुनते ही बेला कहती है – क्या शादी? नही नही में अभी तैयार नही हूँ।

माहिर: कोई बात नहीं, तुम आराम से सोचकर बताना। मुजे कोई जल्दी नही है, लेकिन मुझे तुम्हारे जवाब का इंतजार रहेगा।

समय बीतता जाता है। धीरे धीरे बेला को माहिर पसन्द आने लगता है और वो दोनों शादी करने का तय करते है।

बेला और माहिर पूरे रीती-रिवाज के साथ मंदिर में पूरे गांव के सामने शादी करते है। हर कोई बेला और माहिर को आशीर्वाद देता है।

Naagin 3: Intaqaam

बेला पूरे घर को दियों से सजाती है।

माहिर: बेला दियों की रोशनी से हमारा घर बहुत सुंदर लग रहा है।
बेला: इसीलिए तो सजाये है। दिये प्रकाश का रूप होते है। ये दिये हमारे इस नए जीवन को प्रकाश से भर दे और बुराई रूपी अंधकार को हमारे जीवन से मिटा दे ये ही मेरी महादेव से प्राथना है।

माहिर: तुम सही कह रही हो बेला, आज हम दोनों एक हो जाएंगे। बेला में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। तुम्हारे बिना मेरा जीवन अब कुछ नही है। इस दिन का मेने बहुत समय से इंतज़ार किया था। आखिर वो दिन आही गया। आज हमारे मिलन की रात है बेला।

बेला: माहिर में भी तुमसे प्यार करती हूं, लेकिन पता नही साथ मे मन मे एक डर सा भी लग रहा है।
माहिर: कैसा डर?
बेला: पता नही, लेकिन कुछ गलत हो रहा हो ऐसा लग रहा है।

माहिर बेला का हाथ अपने हाथ मे रखता है और कहता है – कुछ नही बेला, डर मत, कुछ नही होगा, अभी तो हमारा जीवन शरू हुआ है। सब अच्छा ही होगा। तुम बेठो में दरवाजा बंध करके आता हूं।

सुबह हो जाती है। बेला उठ कर तैयार हो जाती है फिर वो माहिर को उठाने जाती है।

बेला: माहिर उठ जाओ, सूर्यदेवता बाहर निकल आये है। आज ये हमारे जीवन की नई सुबह है। और मै ये एक एक पल अच्छे से बिताना चाहती हूँ। आज में चाहती हूँ कि हम साथ मंदिर जाए और शिवजी का आशीर्वाद ले। अरे तुम उठो चलो।

लेकिन माहिर उठता नही है। बेला माहिर को उठाने का बहुत प्रयास करती है लेकिन माहिर की आँख नही खुलती। बेला को घबराहट होने लगती है। वो तुरंत दौड़ते हुए वैध के घर जाती है और उनको माहिर के पास लेकर आती है। आसपास के सब लोग भी घर पे जमा हो जाते है।

वेधजी: बेला, माहिर अब इस दुनिया मे नही रहा।

ये सुनते ही बेला सिर पर हाथ रखकर जमीन पर गिर जाती है। बेला मानने को तैयार ही नही होती कि माहिर अब इस दुनिया मे नही रहा। वो माहिर के शरीर को हिलाते हुए कहती है, “नही, ये नही हो सकता, माहिर उठो। मेरे साथ ऐसा मजाक मत करो। चलो बहुत हुआ नाटक बस उठो। मुझे इतना मत सताओ। इतना बोलते ही बेला माहिर के सीने पर अपना सर रख कर रोने लगती है।

बेला की आँखों से आंसू रुकने का नाम नही लेते। गाँव की औरतों बेला को संभालती है। फिर बेला माहिर का सिर अपने हाथ मे लेकर बोलती है – माहिर ये क्या हो गया! तुम मुझे ऐसे अकेला छोड़ कर नही जा सकते।

इतना बोल कर बेला खड़ी होती है फिर अपने आँसू पोछ कर कहती है, “बस अब आप सभी माहिर के साथ साथ मेरा भी अंतिमसंस्कार कर दो। मै नही जीना चाहती।” कुछ औरते बेला को पकड़ कर उसको संभालती है और उसे नीचे बिठाती है। फिर वो औरते बेला के सिर का सिंदूर मिटाती है और उसके हाथ की चूड़ियां तोड़ती है।

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बेला: ये क्या हो गया, माहिर, हमारी कहानी तो शरू होने से पहले ही खत्म हो गई। बेला फुट फुट कर रोती है। गाँव के लोग तरह तरह की बाते करते है, “देखो तो नसीब का खेल, शादी को सिर्फ एक रात बीती और ये विधवा हो गई।

अब माहिर के अंतिमसंस्कार के लिए विधि शरू होती है। फिर माहिर को ले जाने लगते है। बेला पीछे जाती है और चिल्लाती है, “नही, मत ले जाओ। माहिर…को” सब औरते उसको पकड़ कर रोकती है। लेकिन फिर बेला खूद को छुड़ाकर महारुद्र शिवमंदिर जाती है और महादेव के सामने हाथ जोड़कर बैठती है।

बेला: हे महादेव, आपने ये क्यो किया। आज आपको जवाब देना ही पड़ेगा।

तभी एक महिला कहती है, “मैने तो सोचा था कि दो दिन बाद नागपंचमी है। तो महारुद्र शिवमंदिर में बेला और माहिर के हाथों से महापूजा करवाउंगी। लेकिन देखो क्या हो गया। पता नही महादेव क्या चाहते है।

ये सुनते ही कि दो दिन बाद नागपंचमी है बेला को उसकी कसम याद आती है और साथ ही उसका अपमान भी याद आता है। बेला बोलती है, “है, महादेव ये मुझसे क्या हो गया। मै कैसे भूल गई कि में एक नागिन हूँ। मै कैसे एक इंसान से प्यार कर बैठी। माहिर मुझे माफ कर देना। तुम्हारी मौत के लिए सिर्फ और सिर्फ में ही ज़िम्मेदार हूँ। आखिर में कैसे भूल गई कि एक नागिन और इंसान का मिलन संभव नही है, ये नियम के विरुद्ध है।

इंसानो के बीच रहते हुए में खुद को इंसान कैसे समझ गई। मेरा तो सिर्फ एक ही इंसान से नाता है, राजा विक्रमादित्य से बदला। महादेव माहिर की मौत के लिए आप मुझे जो सजा देंगे वो मुजे मंजूर होगी लेकिन अब समय आगया है कि में विक्रमादित्य को उसकी करतूतों की सजा दूँ।  मुजे मेरी कसम याद आ गई है। बस अब नही, नागपंचमी के दिन विक्रमादित्य की कहानी खत्म होगी।” बेला तय करती है कि वो अपना इंतकाम लेने जाएगी।

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नागपंचमी की सुबह बेला अपना इंतकाम लेने निकल पड़ती है।

राजमहल में यामिनी राजा विक्रमादित्य से कहती है- “महाराज, आज नागपंचमी है वो नागिन आएगी तो नही ना?”

बेला दासी का रूप लेकर रसोई घर मे जाती है और खीर का कटोरा उठाती है फिर बोलती है, “कहते कि अगर मीठे में जहर मिलादो तो वो ओर भी ज़ेरिला हो जाता है। मीठी तोये खीर है ही और ज़ेरिली तो में हूँ ही।

बेला खीर में अपना ज़हर मिलाती है। फिर नागिन वो कटोरा राजा को देती है।
बेला (दासी के रूप में): महाराज, ये खीर रानी यामिनी ने खास आपके लिए भेजी है।

राजा: ठीक है।

विक्रमादित्य खीर खाता है। और बेला भी इंतज़ार करती है, “बस, अब कुछ ही समय की देरी है तेरी मोत में विक्रमादित्य।” खीर खाते हुए विक्रमादित्य को कुछ होने लगता है उसके हाथ से खीर का कटोरा गिर जाता है। विक्रमादित्य के शरीर मे अजीब सा बदलाव आता है। उसके मुख का रंग बदलता है मानो उसको कोई बीमारी हो गई हो। रानी यामिनी तुरत उधर आती है और वो विक्रमादित्य को कमरे में ले जाती है।

बेला भी दासी के रूप में साथ मे जाती है। यामिनी बेला से पूछती है, “सुनो दासी महाराज ने कुछ खाया था? या कुछ पिया था?” बेला बड़े ही शांत स्वभाव के साथ कहती है, “नही महारानी, महाराज ने कुछ भी नही खाया।”

ये सुनते ही विक्रमादित्य के होश उड़ जाते है, वो सोचता है आखिर ये दासी क्यो झूठ क्यू बोल रही है। इसीने तो मुझे खीर दी थी और कहा था कि ये खीर यामिनी ने भेजी है। इसके इरादे कुछ ठीक नही लग रहे। तभी यामिनी खड़ी होती है और कहती है, “दासी, तुम इधर रहो में अभी आती हूँ, इनको वेधजी की सख्त जरूरत है।

इतना बोलते ही यामिनी तुरंत कमरे में से बाहर चली जाती है। बेला बड़ी सी मुस्कुराहट के साथ कहती है- “इसको अब वेध नही सिर्फ और सिर्फ पंडित की जरूरत है, जो इसका अंतिमसंस्कार कर सके।”

Naagin 3: Intaqaam

ये सुनते ही राजा विक्रमादित्य की आँखे फटी की फटी रह जाती है। बेला कमरे का दरवाजा बंध करती है फिर कहती है- “चिंता मत कर तू, तेरे अंतिमसंस्कार के लिए उसी पंडित को बुलाऊंगी जिसकी बाते सुनकर तूने मेरा घोर अपमान किया था।”

ये बात सुनकर राजा धीरी सी आवाज में बोलने की कोशिश करता है, “बेला…”
बेला: हाँ, मै हूँ बेला। याद है ना आज से एक साल पहले क्या हुआ था।

अब बेला दासी के रूप से अपने असली रूप में आती है।

बेला: देख कौन खड़ा है तेरे सामने विक्रमादित्य। मै हूँ नागिन। तूने जो मेरे साथ किया था, सारी प्रजा के सामने मुझे लात मारी थी। वो अपमान में आज भी नही भूली हूँ।

एक अन्जान इंसान की बात सुनकर तूने मेरे साथ जो किया था, वो मुझे याद है। देख तेरी मौत अब तेरे सामने खड़ी है। बस कुछ क्षणों की बात है। तुझे तेरे किये की सजा देने आ गई हूँ मै। तूने मेरी बली चढाई थी ना, अब में तेरी बली चढ़ाऊंगी। तेरा काल आ चुका है।

बेला का गुस्सा अब उसपे हावी हो रहा था। वो अपनी ज़हरीली जीभ निकालती है और विक्रमादित्य को डसती है। विक्रमादित्य जोर से चिल्लाता है।

राजा की आवाज सुनकर सिपाही और यामिनी दौड़ते हुए आते और दरवाजा खोल ने की कोशिश करते है लेकिन दरवाज़ा नही खुलता। बेला अब आधी इंसान और आधी सर्प रूप में आती है और विक्रमादित्य को अपने शरीर मे लपेट लेती है फिर उसे कमरे में लगे जुमर से उसे लटकती है। फिर बेला राजा को छोड़ देती है। विक्रमादित्य सीधा जमीन पर गिरता है। बेला अब साँप बन जाती है और वो दीवार से होकर जुमर तक पहुचती है। तभी दरवाजा टूट जाता है और यामिनी अंदर आती है।

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राजा की हालत देखकर वो दौड़ते हुए राजा के पास जाती ही है की ऊपर से जुमर नीचे सीधा राजा पर गिरता है और विक्रमादित्य की उधर ही मौत हो जाती है।

ये देखते ही यामिनी जोर से चिल्लाती है, “महाराज…” फिर वो विक्रमादित्य के पास आती है, “महाराज, उठिये, ये क्या हो गया आपको। ये किसने किया, महाराज कुछ तो बोलिये।” फिर यामिनी ऊपर देखती है। उधर बेला सर्प के रूप में होती है। उसे देखकर यामिनी कहती है, “ओ नागिन, हिम्मत है तो सामने से वार कर ना, ऐसे पीठ पीछे क्यो वार करती है। हिम्मत है तो मुझसे लड़ है हीम्मत।

बेला सरकते हुए नीचे आती है और अपने असली रूप में आती है। तभी एक सिपाही उसे पकड़ने आता है, बेला तुरंत अपनी जीभ बाहर निकालती है।

बेला: अगर किसी ने मुझे छूने की कोशिश भी की तो उसका हाल इस विक्रमादित्य से भी बत्तर करदूंगी। सभी लोग पीछे हट जाते है।

यामिनी: नागिन ये तूने ठीक नही किया। तूने मेरे सुहाग को मुझसे छीना है अब देख में तेरे साथ क्या करूँगी।

बेला: देखो यामिनी, मै किसी निर्दोष इंसान की जान नही लेती। इस लिए में तुम्हे कुछ नही करूँगी। ये तो तुम भी जानती हो कि तुम्हारे पति ने मेरे साथ क्या किया था।

यामिनी: नागिन, तेरी नज़र में तो रिश्तो की कोई किंमत ही नही है। तू चाहती तो महाराज को माफ भी कर सकती थी।

बेला: विक्रमादित्य ने जो किया वो माफी के लायक तो था ही नही। हा, मै माफ कर भी देती। लेकिन क्या विक्रमादित्य खुद इस माफी के लायक था?

यामिनी: इतनी बड़ी बड़ी बातें करती होना तुम। अब देखना तुझे भी इस कार्य का मूल्य चुकाना पड़ेगा। मेरे सुहाग को उजाड़ ने वाली नागिन में तुजे ज़िंदा नही छोडूंगी।

बेला: देखो, हमारा आपस मे कोई नाता नही है। इसलिए में अब तुमसे नाही कुछ चाहती हूँ और नाही कोई रिश्ता रखना चाहती हूँ। मुझे जो काम करना था वो मेने कर दिया। मेने मेरा बदला ले लिया है। मेरा इंतकाम पूरा हुआ। तुम्हारे लिए भी अच्छा यही होगा कि तुम भी ये भूल जाओ। ईतना बोल कर बेला सर्प बनकर खिड़की से निकल कर चली जाती है।

यामिनी: नही बेला नही, रिश्ता तो हमारा अब जुड़ चुका है। तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी दुश्मन हो। आज शायद तुम्हारा दिन था इसलिए तुम बच गई। लेकिन मेरा भी दिन आएगा नागिन। मेरे सीर का सिंदूर छीना है ना तुमने, देखना अब तेरी मोत की कहानी में खुद अपने हाथों से लिखूंगी। तुम्हारे जैसी नागिनों को कैसे रास्ते से हटाते है, ये में अच्छी तरह से जानती हूं।

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