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The Mirror

  • Post published:July 19, 2021
  • Post category:Stories
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SKR Creations The Mirror | एक आइना: 50 वर्षीय गणेश नाम के एक व्यक्ति अपने घर में आता हुआ अपनी 21 वर्षीय बेटी को पुकार रहा था।अनन्या अपने पिता की आवाज में दौड़ती हुई आई।

गणेश के हाथों में एक आइना था। उसने अनन्या को आईना सौंपते हुए उसने कहा – “यह लो आइना। कल तुम कह रही थीं न कि तुम्हें एक बहुत सुन्दर आइना लाना है।”

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‘‘हां।” ‘‘मैं ले आया। यह बाज़ार में मिलने वाला सबसे महंगा है।”

“ओ थैक्यू पापा” अनन्या ने अपने हाथों में एक प्रसन्न मुद्रा के साथ आइना लेकर देखते हुए कहा- “यह तो बहुत सुन्दर आइना है। मैं इसे अपने रूम में लगाऊंगी।”

“चाहे जहां लगाओ।”

‘ओके’

इसके साथ, अनन्या उस खूबसूरत आइने को लेकर अपने रूम में चली आई। उसने आइना तत्काल अपने खूबसूरत कमरे की सुन्दर दीवार पर टांग दिया।

आइना लगभग 12 इंच लंबा और 15 इंच चौड़ा था। सुनहरे फ्रेम का यह सुंदर आइना कारीगर द्वारा बड़ी शान के साथ बनाया गया था। अनन्या आइना दीवार पर टांगने के बाद अपने बैड पर आ गई और एक बुक पढ़ने लगी।

अचानक उसे महसूस हुआ कि उसका कमरा तरह-तरह के रंगों से रोशन हो रहा है। उसने चारों तरफ नजर घुमाई तभी उसकी नजरें आइने पर पहुंचकर रुक गईं।

दरअसल, उनके कमरे में कांच से प्रकाश के कई रंग निकल रहे थे। जब अनन्या ने देखा कि उसके कमरे में फैली रंगीन रोशनी शीशे से बाहर आ रही है, तो उसने किताब वहीं छोड़ दी और बिस्तर से नीचे आकर आईने के करीब चली गई।

अनन्या आश्चर्यचकित रह गई जब उसने दर्पण में रंगों को ध्यान से देखा। वह कुछ क्षणों तक लगातार दर्पण को देखती रही।
अचानक आइने में रंगों के साथ एक डरावनी शक्ल को देख अनन्या इतनी बुरी तरह से डरी कि उसके हलक से सांस भी चीख के रूप में निकली।

उसी समय!

आइने में आई डरावनी शक्ल ने अपने दोनों हाथ आइने से बाहर निकालकर अनन्या की गर्दन पकड़ उसे अपनी ओर खींचा अनन्या आइने में घुसती हुई चीखने लगी।

तभी गणेश अनन्या की चीख सुनकर उसके कमरे में आया तो अनन्या गायब मिली।

आइना अपने वास्तविक रूप में था। न उसमें कोई रग उभर रहा था और न कोई डरावनी शक्ल। तभी गणेश अनन्या की तलाश में उसे पुकारता हुआ बाहर चला आया।

जैसे ही वह अपने कमरे से बाहर आया, आइने में एक बार फिर डरावना चेहरा छा गया और इस बार किसी आदमखोर जानवर की तरह उसने मुंह फाड़ा। लेकिन जल्द ही वह चेहरा भी गायब हो गया।

इधर,

अनन्या आइने की दुनिया में पहुंची तो वहां उसे एक बंजर इलाका मिला जो कि पथरीला था। दूर-दूर तक गहरा सन्नाटा था। हर तरफ पत्थरों का कब्जा था। ऊंची-ऊंची पहाड़ियां होने के साथ वहां छोटे-छोटे पत्थर जमीन पर बिखरे हुए थे।

अनन्या भयभीत थी। वह चारों ओर देखते हुए सोच रही थी कि वह कहा आ गई ?

उसी वक्त किसी ने पुकारा – ‘अनन्या…’
उसने मुड़कर देखा कि एक बूढ़े ने उसे पुकारा है। बूढ़े की आयु 100 वर्ष के लगभग थी।

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अनन्या अकेली इस सुनसान जगह पर उस बूढ़े की मौजूदगी का सहारा पाकर झट उसके करीब पहुंची। और बोली –

‘आप कौन हैं?’

“तुम्हारी तलाश में पल-पल भटकने वाला..।’ बूढ़े ने कहा।

‘मैं कुछ समझी नहीं।’

‘अभी समझाता हूं।’ बूढ़ा बोला।”

उसी समय, बूढ़े आदमी ने ऐसा भयावह रूप लिया किअनन्या की चीख निकल गई। वह जोर से चीखती हुई अपनी जगह से वापस आई।

बूढ़ा अपने रूप में बहुत डरावना भूत बन गया था। वह उसके पीछे दौड़ा और बोला –

“मैं लंबे समय से भूखा और प्यासा हूं।” आज मैं तुम्हें अपना आहार बनाऊँगा और अपनी भूख और प्यास मिटाऊंगा। ‘

अनन्या दौड़ती रही। दौड़ते-दौड़ते वो पसीनों से पूरी भीग गई थी। वो भूत लगातार उसके पीछे दौड़ रहा था। दौड़कर अनन्या एक पहाड़ी के पीछे आकर छिप गई।

बूढ़ा भूत भी उसके पीछे-पीछे आया, मगर तब तक अनन्या पहाड़ी का एक राउण्ड लेकर उसके पीछे छिप गई थी। बूढ़ा भूत उसे अपनी नजरों से ओझल पाकर अपने स्थान पर थम गया, फिर धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाने लगा।

भूत का एक हाथ पहाड़ी पर था। वह हाथ हिलता हुआ नीचे पहाड़ी पर जा रहा था।

जब वो पहाड़ी के अगले छोर पर घूमने रहा था, तब सबसे पहले अनन्या ने उसका हाथ देखा। उसका हाथ भी बहुत डरावना था। इसी कारणवश अनन्या उस भयंकर हाथ को देखकर एक बार फिर चिल्लाई।

उसके चीखते ही भूत तत्काल उसके सामने आ गया। और फिर वहां से अपना स्थान छोड़ते हुए दौड़ने में अनन्या ने अधिक वक्त न लगाया। बड़ी फुर्ती के साथ वो वहां से भी भाग निकली।

अपनी डरावनी शक्ल वाला यह भूत निरंतर अनन्या का पीछा करता रहा। दौड़ते-दौड़ते वह बुरी प्रकार हांफने लगी थी। उसके नंगे पैरों में अनेकों नुकीले पत्थरों के चुभ जाने से इतने जख्म हो गये थे कि अब उसके लिए और अधिक दौड़ पाना बड़ा मुश्किल हो चला था, मगर जान बचाने की खातिर उसकी रफ्तार में कोई कमी नहीं आ रही थी।

अनन्या दौड़ते-दौड़ते अचानक एक गड्ढे में गिर गई। गढ़ा अधिक गहरा नहीं था, लेकिन भूत के आने से पहले इससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल था।

अनन्या ने शीघ्रता के साथ उस गड्ढे से निकलने का उपक्रम किया ही था कि भूत उसके सिर पर आकर मंडराने लगा। साथ ही वह अपनी भंयकर आवाज में अनन्या पर गुर्राया भी। उसकी गुर्राहट से वो डर गई। वापस गड्डे में ही धंस गई।

कुछ क्षण रुककर अनन्या ने उससे अपने बचाव का एक उपाय ढूंढा। उसने गड्ढे में पड़े कई पत्थरों में से एक को उठाया और उसे भूत के चेहरे पर पूरी ताकत से मारा।

चेहरे पर पत्थर लगते ही भूत बौखला गया। इस बीच अनन्या फटाफट गड्ढे से निकलकर बाहर आई और फिर से दौड़ने लगी। भूत भी उसके पीछे दौड़ा।

इस बार अनन्या और तीव्रता के साथ दौड़ रही थी। उसने पीछे पलटकर भूत को देखा तो आगे आई एक शैतान की मूर्ति से वो टकरा गई। शैतान की मूर्ति झटका खाकर नीचे गिरी और टूटकर टुकड़ों में बंट गई।

उस मूर्ति के टूटते ही भूत जोर से चिल्लाया। इस तरह मानो उसे भयंकर तकलीफ का सामना करना पड़ रहा था। अनन्या ने अपने स्थान पर रुककर भूत को देखा।

जल्द ही अनन्या ने भयानक दृश्य देखा जिसे देखकर वह भयभीत हो गई, लेकिन उतना ही राहत मिली। उसने देखा कि भूत एटमबम की तरह फटा और चीथड़ों में बिखरकर हवा में उसके जिस्म के ढेरों टुकड़े लहरा गये।

उसी समय, हवा के तेज झोंके ने अनन्या को अपने साथ उड़ा लिया और जमीन से गिरते ही अनन्या बेहोश हो गई। जब उसे होश आया, तो उसने खुद को अपने कमरे में पाया। उसने जल्दी से उठकर शीशे में देखा।

रंगीन रोशनी अभी भी आईने में टिमटिमा रही थी।

तभी गणेश अचानक से अंदर आया और अनन्या से बोला बेटी अभी तुम कहाँ थीं। मैंने तुम्ह्रारे चिल्लाने की आवाज सुनी तो अंदर देखा तुम यहाँ नहीं थीं। फिर में दोबारा 1 मिनट बाद अंदर आया तो तुम यही हो।

अनन्या ने मन में सोचा पर में तो कई घंटो से आईने की दुनिया में थी। उसी समय उसने सोचा कि यह आइना उसे समुद्र में फेंक देना चाहिए, ताकि अगली बार कोई और इस आइने की दुनिया में न फंस सके।

इसी इरादे के साथ उसने आइना उतारा और उसे फेंकने के लिए चल दी ।

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