Wo Kon Thi

Wo Kon Thi | वो कौन थी: सितंबर के महीने की काली अँधेरी रात थी। धीरे धीरे हवा की ठंडी लहरें चल रही थी, आकाश में बिजली चमक रही थी। सुरेन्द्र अपने घर से दूर अपने खेत में खाट में सोया हुआ था।

उसका खेत गाँव के तालाब के पास था। बारिश के कारन पूरा तालाब पानी से भर गया था और खेत में घास भी ज्यादा हो गई थी। जिसके कारण अंधेरे में यह सब बहुत ज़्यादा डरावना लग रहा था। उस तालाब के किनारे आम के 5 -6 बड़े बड़े पेड़ थे। आम के पेड़ की पक्तियों की आवाज भी काफी डरावनी लग रही थी।

अचानक खेत में बंधी हुई भैंसो ने चिल्लाना शरु कर दिया। सुरेन्द्र को पता ही नहीं चल रहा था की आखिर यह भैंसे ऐसा क्यों कर रही है। उसे लगा की शायद ठंड के कारण यह भैंसे ऐसा कर रही हैं। इसीलिए सुरेन्द्र ने खेत में चिमनी जलाई।

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उस चिमनी के उजाले में सुरेन्द्र की नजर उसकी खाट पे पड़ी। उन्होंने देखा की एक स्री उनकी खाट पे बैठी है। यह देख कर उनका शरीर डर के मारे कांपने लगा। उसी वक्त आकाश में बिजली का तेज गड़गड़ाहट हुई।

वैसे तो सुरेन्द्र बहादुर था, लेकिन आज उन्हे भी थोड़ा डर लग रहा था। उसी वक्त सुरेन्द्र ने आग में शुकी घास डाली और आग को ज्यादा बढ़ाया इसकी वजह से वो औरत ठीक से दिखाई दे रही थी।

सुरेन्द्र ने आग के पास बैठे बैठे यही सोचने लगे कि “वह कोन है?” पर सामने से कोई प्रतिक्रिया नई मिली। इसीलिए सुरेन्द्र अचंबित रह गए। उनकी समज में कुछ नई आया। अब वे खड़े हो गए।

इसीलिए सुरेन्द्र ने सोचा की अब डरने से कुछ नई होगा , मुझे हिम्मत से काम लेना पड़ेगा।

Wo Kon Thi | वो कौन थी

उन्होंने ने एक बड़ी लकड़ी हाथ में लेली और बोले कौन हो तुम? तुम्हे क्या लगता है, कि मैं तुमसे डर गया हूँ ?

लेकिन सच तो यही था की सुरेंद्र अंदर से पूरी तरह से डर के मरे कांपने लग रहा था । सुरेंद्र का यह गुस्से वाला रूप देखकर वो स्री खड़ी हो गई और जोर से बोली, “क्या तुम मुझसे नहीं डरते…?”

सुरेंद्र ने हिम्मत की और बोला, “यहां से चली जाओ वरना यह लाठी से मार मार के तेरा सिर फोड़ दूंगा”। इतना बोलते ही सुरेंद्र ने लाठी उठाई और उसी वक्त वह औरत तेज आवाज में बोली। “अब तू मुझे मेरे ही घर से बाहर निकालेगा? यहां पर तो मेरा बचपन गुजरा है। यह मेरा ही घर है मैं यहां सालों से रह रही हूं।

यह सुनकर सुरेंद्र का डर और गुस्सा दोनों ही शांत हो गए। उन्हें लग रहा था कि मेरे सामने जो औरत खड़ी है उसे मैं जानता हूं, उसकी आवाज भी जानी पहचानी लग रही थी। सुरेंद्र सोचने लगे कि आखिर यह औरत है कौन?

अगर मैं इस औरत को जानता हूं तो आखिर यह इतनी भयानक और विकराल रूप में क्यों है? अचानक, अरे यह तो ज्योति है, मेरी बड़ी बहन। बचपन में मैं और ज्योति साथ में ही खेत में चारा काटने का काम करते थे।

अब सुरेंद्र को पूरी बात समझ में आ गई। यह ज्योति के बचपन की बात है। जब ज्योति 14 साल की थी तब इसी खेत में गांव के कुछ बच्चों के साथ खेल रही थी। दूसरे बच्चों की तरह ज्योति भी पेड़ पर चढ़कर एक डाल से दूसरे में डाल पर छलांग लगा रही थी।

Wo Kon Thi | वो कौन थी

अचानक ज्योति जिस डाल पर बैठी थी वह डाल टूट गई और ज्योति मुंह के बल नीचे गिर गई। यह देखकर सारे बच्चे डर के मारे चिल्लाने लगे। बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर बड़े लोग वहाँ पहोंचे ओर ज्योतिको उठाके हस्पताल ले गए लेकिन तबतक काफी देर हो चुकी थी। ज्योति की मौत हो गई थी।

सुरेंद्र को ये सारी बाते याद आ गई, और वह सीधा ज्योति के पास जाके रोने लगा। जब यह बात गाँव वालों को पता चली तो सारे गाँव वाले चोंक उठे थे। वास्तव में वह ज्योति ही थी।

गाँव के एक बड़े बुजुर्ग ने कहा कि, “जब ज्योति मौत हुई थी तब वो एक बच्ची थी। इसी लिए उसे बालक समझ के उसे दफ़नाया गया था। लेकिन वास्तव में उसका अंतिम संस्कर करने की जरूरत थी।”

इसीलिए ज्योति की आत्मा आज तक भटक रही है। सुरेंद्र ने तुरंत ही ज्योति को जहा दफ़नाया गया था वहां से उसे निकाला। किस की भी हिमत नही हो रही थी कि कोई उसके पास भी जा सके।

उसी वक्त ज्योति की आत्मा ने गाँव वालों के सामने आके कहा कि, “हाँ, आपकी बात सही है, मैं मर चुकी हूं, आप लोगो को मुझसे डर ने की जरूरत नही है, मैं अभी भी इसी गाँव की बेटी हूँ, लेकिन मैं आज तक भटक रही हूँ , मुझे मुक्ति दीजिये।

बाद में सुरेंद्र ने ज्योति के शब का अग्नि संस्कार किया और उसकी आत्मा को शांति दिलाई।

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